भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की रेस में आगे, क्या इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की रफ्तार पकड़ना एक नया जोखिम है?


परिचय

क्या आपने कभी सोचा है कि स्मार्टफोन, कंप्यूटर या यहां तक कि आपकी नई कार तक किस चीज़ से चलती है? जवाब है – सेमीकंडक्टर चिप्स! ये छोटी लेकिन बेहद ताकतवर चीजें, आज दुनिया की पूरी तकनीकी अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। भारत अब इस दौड़ में इतनी तेजी से भाग रहा है कि पूछिए मत। लेकिन क्या इस तेज रफ्तार के साथ कुछ अनदेखे खतरे भी आ रहे हैं?

आज हम आपको बताएंगे कि भारत किस तरह ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की रेस में है, किन नए बदलावों की शुरुआत हो रही है, और यह पूरा घटनाक्रम आपको, भारत को और दुनिया को कैसे प्रभावित करने वाला है।


पृष्ठभूमि / संदर्भ

सेमीकंडक्टर क्यों इतना बड़ा मुद्दा बन गया है?

  • आधुनिक जगत का हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सेमीकंडक्टर के बिना अधूरा है।
  • वैश्विक सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 83 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंचने वाला है।
  • लेकिन, आज भी इसका उत्पादन कुछ ही देशों – जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया, और USA – में केंद्रित है।
  • कोविड-19 के दौरान जब सप्लाई चेन टूटीं, तो ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को तगड़ा झटका लगा।
  • यही वजह है कि अब ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन और ‘मेक इन इंडिया’ की मांग तेज हो गई है।

कौन-कब-कहां-कैसे?

  • सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) सेक्टर को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा है।
  • भारत सेमीकंडक्टर मिशन, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम और DLI (डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव) जैसी योजनाओं से इकोसिस्टम का निर्माण किया जा रहा है।
  • 2025 में IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने नोएडा और बेंगलुरु में पहली एडवांस्ड 3-नैनोमीटर चिप डिज़ाइन फैसिलिटीज लॉन्च कीं।
  • पिछले 2 वर्षों में चिप डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स की बाढ़ सी आ गई है।

मुख्य घटनाक्रम व प्रमुख जानकारियां

सेमीकंडक्टर डिमांड, लेकिन जटिल रेस

  • दुनिया भर में चिप्स की मांग तेज़ – स्मार्टफोन, 5G, AI, ऑटो, स्किल्स, आईओटी, कैमरा हर जगह इनकी जरूरत है।
  • समस्या? – सस्ता पाना मुश्किल, सप्लाई असुरक्षित।
  • भारत इकोसिस्टम बना रहा है – पर क्या यह आसान है?

हाल की उपलब्धियां

  • 2025: नोएडा व बेंगलुरु में भारत के पहले 3-नैनोमीटर चिप डिज़ाइन केंद्र का उद्घाटन।
  • गवर्नमेंट DLI योजना के तहत स्टार्टअप्स को 234 करोड़ रुपये की मदद।
  • 22 कंपनियों की चिप डिज़ाइन परियोजनाओं में निवेश।
  • 72 से अधिक कंपनियों को सॉफ्टवेयर टूल्स की मदद दी गई।
  • स्टार्टअप नेत्रसेमी को 107 करोड़ का वेंचर केपिटल मिला – स्मार्ट विजन, आईओटी, सीसीटीवी और AI आधारित प्रोडक्ट्स के लिए।
  • 5 स्टार्टअप्स ने ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरर्स के साथ पहली बार डिजाइन और टेस्टिंग की।

नीति आयोग से मंत्री तक – स्टेटमेंट्स और टार्गेट्स

“भारत में बड़ी डिज़ाइन क्षमताएं हैं। सेमीकंडक्टर मिशन की वजह से भारतीय स्टार्टअप विश्व स्तर पर पहचान बना सकते हैं।”
– अश्विनी वैष्णव, आईटी मिनिस्टर

  • सरकार के मुताबिक, आईआईटी-केंद्रित ट्रेनिंग, एडवांस टूल्स और इंडस्ट्री क्लस्टर्स की बदौलत 5 साल के अंदर भारत शीर्ष पांच चिप निर्माता देशों में होगा।

भारत बनाम वर्ल्ड: क्या है ग्लोबल पर्सपेक्टिव?

क्यों जरूरी है भारत का उठना?

  • ताइवान और दक्षिण कोरिया, दोनों ही चीन के नजदीक – जिससे सप्लाई चेन पर सुरक्षा का खतरा हमेशा बना रहता है।
  • अमेरिका और यूरोप ने भी अपने-अपने इलाकों में चिप इंडस्ट्री वापस लाने के लिए अरबों डॉलर की योजनाएं बनाई हैं (देखें BBC Semiconductor Crisis)।
  • भारत, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में – स्किल्स, युवा टैलेंट, वर्कफोर्स – इस लिहाज से गेमचेंजर हो सकता है।

कुछ बड़ी चुनौतियां भी

  • भारत अभी तक कोई फाउंड्री (वास्तविक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट) नहीं बना पाया है – यह सबसे महंगा और टेक्निकली बड़ा कदम है।
  • टेक्निकल स्किल्स व रिसर्च में अभी भी ताइवान, साउथ कोरिया, इजरायल पीछे हैं।
  • पानी, बिजली, सुपर क्लीन एनवायरनमेंट – इन सबकी भारी जरूरत होती है।

अब आगे क्या?

आने वाले साल कैसे दिखेंगे?

  • 2030 तक भारतीय सेमीकंडक्टर मार्केट में विदेशी निवेश, जीडीपी और रोजगार में भयंकर बढ़ोतरी संभव।
  • स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डीप टेक्नोलॉजी में भारत आत्मनिर्भर बनने की राह पर।
  • सरकार, इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटीज के कोलैबोरेशन से डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट दोनों तरफ जबरदस्त मौका।
  • रिसर्च, ह्यूमन टैलेंट और फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस बढ़ेगा।

किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

  • आगे कौन सी ग्लोबल कंपनी भारत में फाउंड्री लगाएगी – TSMC, Samsung, Intel या कोई नया प्लेयर?
  • निवेश व सप्लाई चेन का लोकेशन कितना भरोसेमंद होगा?
  • क्या भारतीय कंपनियां सिर्फ डिजाइन में रहेंगी या मैन्युफैक्चरिंग में भी ‘Made in India’ दिखेगा?
  • क्या भारतीय टैलेंट माइग्रेशन रुकेगा?

निष्कर्ष

सेमीकंडक्टर की दुनिया में भारत का सफर तेज़ तो है, मगर जोखिम और चुनौतियों से भरा भी। इनोवेशन, स्किल्स और सरकारी सहयोग की बदौलत भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनने की दहलीज पर है – लेकिन इस लक्ष्य तक पहुंचने की राह में काफी कुछ सावधानी की जरूरत है।

तो अगली बार जब आप अपना फोन इस्तेमाल करें, या नई कार लेने जाएं, तो सोचिए – क्या उसकी चिप ‘Made in India’ है या नहीं?

आपके क्या विचार हैं – क्या भारत वाकई दुनिया का अगला सेमीकंडक्टर सुपरपावर बन पाएगा? अपनी राय कमेंट में बताएं!


आंतरिक और बाहरी लिंक


  1. भारत में सेमीकंडक्टर रफ्तार की चेतावनी!
  2. सेमीकंडक्टर क्रांति: भारत की अनदेखी चुनौतियां
  3. भारत का सेमीकंडक्टर बाजार: खतरे और उम्मीदें
  4. सेमीकंडक्टर के पीछे छुपा भारत का संकट
  5. भारत की चिप रेस – उल्टा असर?
  6. चौंकाने वाली रफ्तार: चिप इंडस्ट्री में संकट
  7. भारत का सेमीकंडक्टर मिशन: छिपे जोखिम
  8. इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में भारत की खतरनाक छलांग
  9. क्या भारत बनेगा नया सेमीकंडक्टर पावरहाउस?
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